'हर शाख पे उल्लू बैठा है' के परिप्रेक्ष्य में पार्टी के वैचारिक पतन की एक तीखी राष्ट्रवादी पड़ताल। राष्ट्रचिन्तन — अंजाम-ए-कांग्रेस राजनीतिक विश्लेषण · कांग्रेस का पतन · विशेष आलेख · अप्रैल 2026 ▶ अप्रैल 2026 · राष्ट्रीय राजनीति विशेषांक जो दल अपने बयानों से अपने शत्रु को संजीवनी देता रहे "हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा" — मिर्ज़ा ग़ालिब उसका भविष्य इतिहास पहले ही लिख चुका है म.च. शास्त्री मनोज चतुर्वेदी शास्त्री Rashtra-Chintan · राष्ट्रचिन्तन · अप्रैल 2026 'हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?' मिर्ज़ा ग़ालिब का यह शेर जब लिखा गया था, तब शायद उन्हें यह नहीं पता था कि डेढ़ सौ वर्ष बाद यह भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी पर इतना सटीक बैठेगा। कांग्रेस का गुलिस्तां आज वह है, जहाँ हर शाख पर एक ऐसा नेता विराजमान है जो अपने ही दल की जड़ें काट रहा है — और भाजपा को घर बैठे संजीवनी दे रहा है। हा...
राष्ट्रचिन्तन — वंदेमातरम् विवाद तुष्टिकरण · अलगाववाद · राष्ट्रीय अस्मिता · विशेष आलेख ▶ अप्रैल 2026 · वंदेमातरम् विरोध का सच "तुष्टिकरण, अलगाववाद और राष्ट्रीय अस्मिता पर चोट एक बेबाक विश्लेषण शास्त्री मनोज चतुर्वेदी शास्त्री राष्ट्रचिन्तन · अप्रैल 2026 ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं है; यह भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संघर्ष और सांस्कृतिक अस्मिता का एक जीवंत प्रतीक है। जब इस गीत का विरोध ‘तौहीद’ या धार्मिक सिद्धांतों के आधार पर किया जाता है, तो यह बहस केवल आस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह राष्ट्रवाद, संविधान, इतिहास और सामाजिक समरसता जैसे जटिल आयामों को छूती है। यह लेख इस पूरे विमर्श को भावनात्मक नहीं, बल्कि विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करता है—जहाँ सांस्कृतिक अस्मिता, ऐतिहासिक संदर्भ, राजनीतिक व्यवहार और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन खोजा जा सके। सांस्कृतिक अस्मिता पर प्रहार: प्रतीक बनाम व्याख्या ‘वंद...